भारत में सोशल मीडिया और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स आज लाखों-करोड़ों लोगों के मनोरंजन और जानकारी का सबसे बड़ा जरिया बन चुके हैं। यहां क्रिएटर्स अपनी बात दुनिया तक पहुंचाते हैं, लेकिन कई बार ये अभिव्यक्ति मर्यादा और संवेदनशीलता की सीमाओं को पार कर जाती है। हाल ही में ऐसा ही मामला सामने आया, जब लोकप्रिय यूट्यूबर्स और कॉमेडियंस Samay Raina और Ranveer Allahbadia (BeerBiceps) समेत कई कलाकारों को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट ने इन कंटेंट क्रिएटर्स को विकलांग व्यक्तियों पर आपत्तिजनक मजाक करने के मामले में फटकार लगाते हुए कहा कि उन्हें अपने प्लेटफॉर्म्स पर बिना शर्त सार्वजनिक माफ़ी जारी करनी होगी।
Supreme Court की कड़ी टिप्पणी
25 अगस्त 2025 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज के दौर के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कॉमेडियंस को यह समझना होगा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब दूसरों का अपमान करना नहीं होता।
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा:
1. विकलांगों का मजाक उड़ाना समाज की संवेदनाओं को ठेस पहुंचाना है।
2. ये सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि commercial speech है क्योंकि ऐसे वीडियो से सीधे तौर पर पैसे कमाए जाते हैं।3. जब कंटेंट पब्लिक डोमेन में आता है, तो उसमें जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का होना बेहद ज़रूरी है।
किन-किन यूट्यूबर्स को फटकार?
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ Samay Raina और Ranveer Allahbadia ही नहीं बल्कि कई अन्य कॉमेडियंस को भी जिम्मेदार ठहराया है। इनमें शामिल हैं:
1. समाय रैना
इन सभी को कोर्ट ने आदेश दिया कि वे अपने-अपने यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर स्पष्ट और Unconditional Apology Video डालें।
बिना शर्त माफ़ी' क्यों ज़रूरी?
कोर्ट ने इस पूरे मामले में “Apology must be proportionate to the offence” का सिद्धांत लागू किया। यानी गलती जितनी बड़ी, उतनी ही ईमानदार और खुली माफ़ी जरूरी है।
इसलिए कोर्ट ने निर्देश दिया कि:
1. माफ़ी लिखित या छोटे नोट की तरह नहीं होनी चाहिए।
केंद्र सरकार को भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इस मौके पर सिर्फ क्रिएटर्स को ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार को भी एक बड़ा आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार:
1. सोशल मीडिया कंटेंट के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश (Guidelines) बनाए।
2. यह तय करे कि “कॉमेडी और फ्री स्पीच की आड़ में समाज के संवेदनशील वर्गों का मजाक न उड़ाया जाए।”3. हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि किसी तरह का पूर्ण प्रतिबंध (Complete Ban) सोशल मीडिया पर उचित नहीं होगा।
इस केस से सीख
इस पूरे विवाद से सोशल मीडिया क्रिएटर्स और यूट्यूबर्स को कई बड़ी सीख मिलती हैं:
1. कंटेंट बनाते समय मर्यादा रखें – मजाक की भी एक सीमा होती है।
2. फ्री स्पीच और जिम्मेदारी साथ-साथ चलती है – जो कहा जा रहा है, उसका असर समाज पर पड़ता है।
3. सोशल मीडिया पर जवाबदेही – जब लाखों लोग आपको फॉलो करते हैं तो आपकी हर बात मायने रखती है।
4. संवेदनशील समुदायों का सम्मान करें – विकलांग, बुजुर्ग या हाशिये पर खड़े लोगों का मजाक उड़ाना असंवेदनशीलता है।
सोशल मीडिया पर बढ़ती जिम्मेदारी
भारत में आज लाखों युवा यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट क्रिएटर बनने की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक तरह से “मार्गदर्शन” (Guideline) भी है कि आने वाले समय में कंटेंट बनाते समय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देनी होगी।
यह सिर्फ कॉमेडियंस ही नहीं बल्कि News Channels, Podcasts, और Influencers सबके लिए एक चेतावनी है कि मनोरंजन और वायरलिटी के चक्कर में समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ न करें।
Samay Raina और Ranveer Allahbadia समेत कई यूट्यूबर्स पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस बात का सबूत है कि भारत में सोशल मीडिया कंटेंट को अब गंभीरता से देखा जा रहा है। यह केवल फॉलोअर्स, लाइक्स और व्यूज़ का खेल नहीं रहा, बल्कि अब यह जिम्मेदारी और नैतिकता का भी मामला है।
आगे चलकर यह केस एक लैंडमार्क जजमेंट बन सकता है, जो सोशल मीडिया क्रिएटर्स को यह याद दिलाएगा कि उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दायरा वहीं तक है, जहां तक किसी और की गरिमा और सम्मान सुरक्षित है।
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